‘अलसी’ का करें सेवन लाखों बीमारियों को कर देगी छूमंतर,जानें

कभी अलसी लोगों की रसोई का प्रमुख हिस्सा होती थी.लेकिन धीरे-धीरे ये लोगों की रसोई से बाहर होता गया और घरों में बीमारियों की एंट्री होती गई.

अलसी उर्फ तीसी पुराने वक्त में हमारे खानपान का अहम हिस्सा थी.अलसी को उसके औषधिय गुणों के कारण ‘असली हीरा’ भी कहा जाता है.

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आयुर्वेदिक मत के अनुसार अलसी वातनाशक, पित्तनाशक तथा कफ निस्सारक भी होती है.मूत्रल प्रभाव एवं व्रणरोपण, रक्तशोधक, दुग्धवर्द्धक, ऋतुस्राव नियामक, चर्मविकारनाशक, सूजन एवं दरद निवारक, जलन मिटाने वाला होता है.यकृत, आमाशय एवं आँतों की सूजन दूर करता है.बवासीर एवं पेट विकार दूर करता है.सुजाकनाशक तथा गुरदे की पथरी दूर करता है.अलसी में विटामिन B एवं कैल्शियम, मैग्नीशियम, कॉपर, लोहा, जिंक, पोटेशियम आदि खनिज लवण होते हैं.

अलसी के फायदे…

– यह कॉलेस्ट्रॉल, ब्लड शुगर, खून के गाढ़ेपन को कम करती है. यह आर्टरीज यानी धमनियों को सख्त होने से बचाती है.

– प्रतिदन 15 फिसदी अलसी पाउडर का सेवन करने वाले लोग मधुमेह के खतरे से बच सकते हैं.अलसी शर्करा ही नियंत्रित नहीं रखती बल्कि मधुमेह के दुष्प्रभावों से भी बचाती है.

– अगर प्रतिदिन अपने भोजन में कुछ मात्रा में अलसी पाउडर को शामिल करते हैं तो दिल के लिए खतरनाक हाई कोलेस्ट्रॉल पर दवाओं के बिना ही नियंत्रण पाया जा सकता है.

– अलसी ओमेगा थ्री फैटी एसिड परिवार का मुखिया अल्फा लिनोलेनिक एसिड का भरपूर स्रोत है जिसकी कमी से कोशिकाओं में ऑक्सीजन की मात्रा कम होने लगती है और शरीर में जानलेवा कैंसर पैर पसारना शुरू कर देता है.

– बॉडी बिल्डिंग में अलसी काफी फायदेमंद होती है. इसमें ओमेगा 3 फैटी एसिड होता है.यह मछलियों में खूब पाया जाता है मगर शाकाहारी बॉडी बिल्डर मछली खाते नहीं इसलिए उनकी जरूरत काफी हद तक अलसी पूरी कर सकती है.

– यह वजन कम करने में काफी सहायक होता है.खाना खाने से पहले फलैक्स सीड खाने से भूख कम लगती है.इससे उन लोगों को फायदा होगा, जिन्हें भूख ज्यादा लगती है या जो लोग डाइटिंग पर हैं.

– जिन लोगों को कब्ज रहता है उन्हें अलसी खाने से फायदा पहुंचता है.इसके छिलके अपने साथ फैट को लपेट लेते हैं इससे बॉडी का फैट कम करने में मदद मिलती है.

– अलसी के उपयोग से छात्रों की स्मरण शक्ति में बढ़ोतरी होती है.

– अलसी सुरक्षित, स्थाई और उत्कृष्ट भोज्य सौंदर्य प्रसाधन है जो त्वचा में अंदर से निखार लाती है.इसमें मौजूद शक्तिशाली एंटी-ऑक्सीडेंट ओमेगा-3 एवं लिगनेन त्वचा के कोलेजन की रक्षा करते हैं और त्वचा को आकर्षक, कोमल, नम, बेदाग तथा गोरा बनाते हैं.

– त्वचा, केश और नाखून के हर रोग और मुहांसे, एग्ज़ीमा, दाद, खाज, खुजली, सूखी त्वचा, सोरायसिस, ल्यूपस, डैन्ड्रफ, बालों का पतला या दोमुंहा होना, बाल झड़ना आदि का उपचार करती है अलसी.इसे चिर यौवन का स्रोत भी कहा जाता है. कई बार देखा गया है कि अलसी के उपयोग से सफेद बाल काले होने लगे.इससे गिरते बाल तो थमते ही हैं साथ में यह नये बाल भी आने में भी मददगार है.किशोरावस्था में अलसी के सेवन करने से कद बढ़ता है.

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