शुभ मुहर्त से लेकर कैसे और क्यों मनाया जाता है रक्षाबंधन,पढ़ें एक क्लिक में

राजसूय यज्ञ के समय भगवान कृष्ण को द्रौपदी ने रक्षा सूत्र के रूप मैं अपने साड़ी का टुकड़ा बांधा था. इसी के बाद से बहनों द्वारा भाई को राखी बांधने की परंपरा शुरू हो गई. ब्राहमणों द्वारा अपने यजमानों को राखी बांधकर उनकी मंगलकामना की जाती है. इस दिन वेदपाठी ब्राह्मण यजुर्वेद का पाठ आरंभ करते हैं इसलिए इस दिन शिक्षा का आरंभ करना अच्छा माना जाता है.

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कैसे मनाएं रक्षाबंधन का त्योहार ?

– थाल में रोली, चंदन, अक्षत, दही, रक्षा सूत्र और मिठाई रखें.

– घी का एक दीपक भी रखें, जिससे भाई की आरती करें.

– रक्षा सूत्र और पूजा की थाल सबसे पहले भगवान को समर्पित करें.

– इसके बाद भाई को पूर्व या उत्तर की तरफ मुंह करवाकर बैठाएं.

– पहले भाई को तिलक लगाएं, फिर रक्षा सूत्र बांधें और फिर आरती करें.

– इसके बाद मिठाई खिलाकर भाई की मंगल कामना करें.

– रक्षासूत्र बांधने के समय भाई तथा बहन का सर खुला नहीं होना चाहिए.

– रक्षासूत्र बंधवाने के बाद माता-पिता और गुरु का आशीर्वाद लें, इसके बाद बहन को सामर्थ्य के अनुसार उपहार दें.

– उपहार में ऐसी वस्तुएं दें, जो दोनों के लिए मंगलकारी हो, काले वस्त्र तथा तीखा या नमकीन खाद्य न दें.

रक्षासूत्र या राखी कैसी होनी चाहिए ?

– रक्षासूत्र तीन धागों का होना चाहिए.

– लाल पीला और सफेद.

– अन्यथा लाल और पीला धागा तो होना ही चाहिए.

– रक्षासूत्र में चंदन लगा हो तो बेहद शुभ होगा.

– कुछ न होने पर कलावा भी श्रद्धा पूर्वक बांध सकते हैं.

इस बार रक्षाबंधन का मुहूर्त क्या है ?

– इस बार 26 अगस्त को भद्रा नहीं रहेगी.

– रक्षाबंधन का मुहूर्त 26 अगस्त को सुबह 7.43 से दोपहर 12.28 बजे तक रहेगा. इसके बाद दोपहर 2 से 4 तक रहेगा.

– सूर्योदय से तिथि मानने के कारण रात में भी राखी बांधी जा सकेगी.

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